यह विवाद एक #पार्किंग को लेकर शुरू हुआ जहां एक वकील पार्किंग वाले स्थल पर अपनी कार खड़ी करके जा रहे थे पुलिस ने मना किया तो वकील साहब ने कहा कि मैं 10 मिनट में आ रहा हूं उसके बाद पुलिस ने कुछ नहीं सुना और "तू
तड़ाक" अमर्यादित भाषा का उपयोग करते हुए लॉकर की तरफ घसीटते हुए ले गए और कहा आज तेरी सारी अकड़ निकालता हू फिर वकील को मारा पीटा इसके विरोध में वकील वहां पर इकट्ठा हो गए जिसके बाद पुलिस ने फायरिंग शुरू कर दी और चार से पांच राउंड फायरिंग की जिसमें 1 गोली एक वकील के सीने में लगी और दूसरी गोली दूसरे वकील के हाथ में लगी जिन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया जिसके बाद वहां पर फोर्स आ गई और वकीलों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटने लगे और उनके चेंबर उनकी गाड़ियां तोड़ने लगे और वकीलों को वहां सेसे भगाने लगे और पुलिस ने लाठीचार्ज शुरू कर दिया और कुछ वकीलों के सिर पर चोटें भी आई जिसके बाद वकीलों ने आक्रोशित होकर पुलिस पर हमला कर दिया जिसमें पुलिस को मारते हुए वकीलों की सीसीटीवी फुटेज वायरल हो गई इसके बाद पूरे देश भर के आईपीएस ऑफिसर आगे आए और पुलिस के लिए मानवाधिकार के कानून की मांग करने लगे जिसके बाद दिल्ली में पुलिस ने अपना मार्च निकालकर वकीलों के खिलाफ कार्यवाही की मांग की तथा जनता को पुलिस का साथ देने के लिए कहा।।
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार भारत में हर वर्ष पुलिस हिरासत में औसतन 2 हजार लोग मारे जाते हैं अर्थात हर रोज 5 से 8 लोगों की हिरासत में मौत तो सरकार मानती है।
जबकी वास्तव में ये 30 से 50 मौत हर रोज होंगी।
जिस देश की पुलिस हर रोज दर्जनों लोगों को बेरहमी से पीट पीटकर, थर्ड डिग्री टॉर्चर करके मार देती है कई लोगो पर झूठे केस पुलिस द्वारा लगा दिए जाते हैं जिसके बाद वो कोर्ट कचहरी के चक्कर काटते रहते हैं वो पुलिस वाले आज भड़के हुए वकीलों द्वारा दो-चार पुलिस वालों को दो-तीन थप्पड़ मार देने पर रो रहे हैं। अब पुलिस को मानवाधिकार याद आ रहे हैं।
मानवाधिकार सिर्फ पुलिस के नहीं, आम आदमी के भी होते हैं जिनको हर रोज थानों में जूतों नीचे रौंदा जाता है।
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जानिए क्या है दिल्ली #तीस_हजारी_कोर्ट का पूरा मामला
Reviewed by Creative Bihari
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November 06, 2019
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